कन्याकुमारी से कश्मीर तक राष्ट्रव्यापी संकल्प यात्रा पहुंची कांकेर,,,,,, मन की पीड़ा दूर करने का उपाय है विहंगम योग:संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज,,,,,,,
महाराज जी ने कहा कि जिन्दगी जीने में ही जिन्दगी बित जाती है, जीवन जीने में ही जीवन चला जाता है और ये जीवन है क्या, कौन हूं मैं इसका अनुभव नहीं हो पाता है।

कन्याकुमारी से कश्मीर तक राष्ट्रव्यापी संकल्प यात्रा पहुंची कांकेर,,,,,,
मन की पीड़ा दूर करने का उपाय है विहंगम योग:संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज,,,,,,,
▪️बस्तर बन्धु▪️
कांकेर- सत्संगति हमारे जीवन को निखारती है। शरीर की पुष्टि और इन्द्रियों की तृप्ति मानव जीवन का उद्देश्य नहीं हो सकता। शरीर का ध्यान रखना है, जितना आवश्यक है। शरीर को सबकुछ समझ कर आत्मकल्याण के मार्ग से दूर हो जाना ये श्रेष्ठ जीवन नहीं है।
महाराज जी ने कहा कि जिन्दगी जीने में ही जिन्दगी बित जाती है, जीवन जीने में ही जीवन चला जाता है और ये जीवन है क्या, कौन हूं मैं इसका अनुभव नहीं हो पाता है।
संत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने जय स्वर्वेद कथा के दौरान कहा कि अध्यात्म का महाशास्त्र है स्वर्वेद। स्वर्वेद हमारी आध्यात्मिक यात्रा को सदैव जागृत रखता है। स्वर्वेद का आचरण मनुष्य को देवत्व में स्थापित कर देता है।
उन्होंने बताया कि भीतर की अनंत शक्ति का सच्चा ज्ञान स्वयं को जानने से होता है। आंतरिक शांति के अभाव से ही आज विश्व मे अशांति है। जब हम आत्म कल्याणकारी विचारों से अपने मन को भरते हैं तब हमारा मन शांत और स्थिर स्वभाव वाला बन जाता है। संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को विहंगम योग के क्रियात्मक योग साधना को सिखाया। कहा कि यह साधना खुद से खुद की दूरी मिटाने के लिए है।
संत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज की दिव्यवाणी जय स्वर्वेद कथा के रूप में लगभग 3 घंटे तक प्रवाहित हुई। स्वर्वेद के दोहों की संगीतमय प्रस्तुति से सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे।
आयोजकों ने बताया कि विहंगम योग सन्त समाज के शताब्दी महोत्सव एवं 25000 कुण्डीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ के निमित्त संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज 7 जुलाई से दक्षिण भारत से संकल्प यात्रा का शुभारंभ हो चुका है। संकल्प यात्रा दक्षिण भारत तमिलनाडु केरल पश्चात छत्तीसगढ़ में दूसरे दिन संकल्प यात्रा कार्यक्रम होते हुए बलरामपुर, अंबिकापुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बालोद के बाद महाकुंभ की नगरी राजिम नवापारा, धमतरी , जगदलपुर बस्तर, गीदम, कोंडागांव के बाद आज कांकेर के बाफना लॉन में कार्यक्रम संपन्न हुआ।
06 एवं 07 दिसंबर 2024 को विशालतम ध्यान – साधना केंद्र (मेडिटेशन सेंटर) स्वर्वेद महामंदिर, वाराणसी के पावन परिसर में 25000 कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ होना है। जिस क्रम में यह संकल्प यात्रा हो रही है जिससे अधिक से अधिक लोगों को पूरे भारत वर्ष में लाभ मिले।
इस शताब्दी महोत्सव में विहंगम योग के प्रणेता अनंत श्री सदगुरू सदाफल देव जी महाराज की 135 फिट से भी ऊंची प्रतिमा (Statue of Spirituality) का भी शिलान्यास होगा।
भक्तों ने अपनी लोक-संस्कृति की पुनीत परंपरा द्वारा सुपूज्य संत प्रवर श्री का हार्दिक स्वागत, सोत्साह,संगीत, एवं पुष्पवर्षा के साथ किया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ के निर्देशक बब्बन सिंह जी,प्रदेश उपाध्यक्ष कोटेश्वर चापड़ी, सत्येंद्र स्वर्वेदी, एच एल चक्रधारी, उमेश साहू, शू श्री श्याम कुमारी उसेंडी, मनेश्वर नाग, उमेश पांडे,श्रीमति किरण नरेटी, बिरेंद्र निषाद, योगेश्वरानंद नेताम, हरेश साहू,प्रसांत यदु महेंद्र साहू, महेन्द्र टांडीया, नरेंद्र यदु, डीआर ठाकुर, परमेश्वरा नंद नेताम, नंदलाल उइके, अशोक ठाकुर, महेश्वरानंद नेताम, भोला पांडे, अजीत देवांगन,श्रीमति रेणुका उईके, विहंगम योग आध्यात्मिक संस्थान जिला कांकेर के समस्त साधक गुरुभाई बहने सहित अन्य आगंतुक श्रद्धालुओ की लगभग हजार लोगो की उपस्थिति रही।
