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आय से अधिक मामले में…..छत्तीसगढ़ पाठयपुस्तक निगम के पूर्व जीएम अशोक चतुर्वेदी गिरफ्तार…..

आंध्रप्रदेश के गुंटूर जिले से गिरफ्तार किया गया।

( बस्तर बन्धु )

रायपुर : छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी की गिरफ्तारी हुई है. एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्लू की टीम ने अशोक चतुर्वेदी को गिरफ्तार किया है.जानकारी के मुताबित ईओडब्ल्यू ने पूर्व जीएम अशोक चतुर्वेदी को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले से अरेस्ट किया है.आपको बता दें कि चतुर्वेदी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज हैं.हाईकोर्ट जमानत याचिका हुई थी खारिज : हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अशोक चतुर्वेदी फरार चल रहे थे. ईओडब्ल्यू और एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम अशोक चतुर्वेदी को कई महीनों से ट्रैस कर रही थी. लेकिन उनकी लोकेशन नहीं पता चल रही थी.लेकिन पिछले दिनों आंध्रप्रदेश के गुंटूर के एक होटल में आरोपी अशोक चतुर्वेदी की लोकेशन मिली.जिसके बाद तत्काल टीम मौके के लिए रवाना हुई और अशोक चतुर्वेदी को दबोच लिया.शनिवार को होगी कोर्ट में पेशी :ईओडब्ल्यू और एसीबी की टीम आंध्र प्रदेश के गुंटूर से रायपुर के लिए रवाना हो गई है. ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के मुताबिक पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व जीएम अशोक चतुर्वेदी को हिरासत में ले लिया गया है.आंध्र प्रदेश के गुंटूर से टीम रायपुर के लिए रवाना हो चुकी है,शनिवार को चतुर्वेदी को कोर्ट में पेश किया जाएगा.

कब से चल रहे थे फरार :अशोक चतुर्वेदी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज है. इस मामले पर हाईकोर्ट ने अशोक चतुर्वेदी की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए कुछ दिनों पहले राहत दी थी.लेकिन ईओडब्लू की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अशोक चतुर्वेदी की जमानत याचिका खारिज कर दी.जिसके बाद से ही अशोक चतुर्वेदी फरार चल रहे थे।

क्या है अशोक चतुर्वेदी के खिलाफ आरोप :छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व सीएम अशोक चतुर्वेदी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज है. शासकीय टेंडर प्रक्रिया में अशोक चतुर्वेदी ने करोड़ों रुपए की अनियमितता की है.जिसके बाद अशोक चतुर्वेदी के खिलाफ अनियमितता की शिकायत दर्ज की गई.जिसके बाद अशोक चतुर्वेदी के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में एफआईआर दर्ज हुई थी. साल 2019 में राज्य शासन ने अशोक चतुर्वेदी की पाठ्य पुस्तक निगम की प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के बाद उन्हें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग उनके मूल विभाग में भेज दिया था ।

Bastar Bandhu

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