15 अगस्त संबंधी दिशा निर्देशों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की उपेक्षा…
क्या सरकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की उपेक्षा करनें वाले लोगों पर कार्यवाही करेगी....

15 अगस्त संबंधी दिशा निर्देश में
स्वाधीनता सेनानियों की उपेक्षा….?
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(बस्तर बन्धु)
रायपुर – इस वर्ष के स्वाधीनता दिवस कार्यक्रमों के संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी दिशानिर्देश का अवलोकन कर हैरान रह जाना पड़ता है। इन दिशानिर्देशों में सबसे आश्चर्यजनक और दुखद बात यह है कि देश की आजादी के लिए लड़ने वाले स्वाधीनता सेनानियों तथा उनके परिजनों को 15 अगस्त के कार्यक्रम में निमंत्रण देने से वंचित कर दिया गया है। केवल शहीद जवानों के परिजनों को ही 15 अगस्त के कार्यक्रम में निमंत्रण देने और सम्मानित करने का दिशा निर्देश है। ज्ञातव्य है कि छत्तीसगढ़ में आज भी कुछ वयोवृद्ध स्वाधीनता सेनानी जीवित है। उन्हें यह जानकर कितना बड़ा सदमा लगा होगा कि आगामी स्वाधीनता दिवस समारोह में स्वाधीनता सेनानियों को ही नहीं बुलाया जा रहा है जबकि पहले ऐसा नहीं था। स्वर्गीय सेनानियों के परिजनों को भी आमंत्रित किया जाता था। इस वर्ष के दिशा निर्देश में स्वाधीनता सेनानी अथवा उनके परिजनों को आमंत्रण देने की बात सिरे से ही गायब है, जोकि इन सभी के लिए अत्यंत अपमान का विषय है और आम जनता भी दुखी है । आश्चर्य है कि ऐसा कैसे हुआ? छत्तीसगढ़ में सरकार कांग्रेस की है । मुख्यमंत्री बघेल की कांग्रेस निष्ठा पर भी संदेह नहीं किया जा सकता। इस प्रकार का अनोखा आदेश उन्होंने तो नहीं दिया होगा कि शहीद सिपाहियों के परिजनों को तो बुलाया जाए लेकिन स्वाधीनता सेनानियों की उपेक्षा की जाए, उन्हें दरकिनार रखा जाए। दिशा निर्देश बदलने का यह गंदा काम किसने किया होगा? क्या यह काम उच्च अधिकारियों का है या फिर उन अधिकारियों का है जो चाहते हैं कि कांग्रेस सरकार बदनाम हो? वास्तविक स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ सरकार में ऐसे कुछ अधिकारी अत्यंत प्रभावशाली हैं जो भाजपा शासन के 15 वर्षों के प्रभाव से अभी तक बंधे हुए हैं…. इनकी सही पहचान भूपेश बघेल की सरकार ने कभी नहीं की और इसी का नतीजा है कि सरकार के कई निर्णय कांग्रेस के विरुद्ध जाते प्रतीत होते हैं। अभी समय है कि भूपेश बघेल सरकार अपने दिशा निर्देशों में आवश्यक परिवर्तन तथा परिवर्धन कर सकती है तथा विघ्न संतोषी तत्वों को सबक सिखा सकती है।
