विभाजन की त्रासदी का ऐतिहासिक नाट्य मंचन,,,,,,मोहित सेवानी टीम जर्नी आफ सिंधीस
अखंड भारत से,,,,,भारत आया हुआ सिन्धी समाज आज स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहा है।


विभाजन की त्रासदी का ऐतिहासिक नाट्य मंचन
मोहित सेवानी टीम,,,,जर्नी आफ सिंधीस
▪️बस्तर बन्धु ▪️
रायपुर — “पूज्य छग सिंधी महापंचायत” के देवेन्द्र नगर स्थित कार्यालय में मुख्य पदाधिकारियों की बैठक उपरांत प्रवक्ता दिनेश अठवानी ने विस्तारपूर्वक बताया कि अखंड भारत से भारत आया हुआ सिन्धी समाज आज स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहा है।।तत्कालीन समयकाल में कांग्रेस के बड़े नेताओं ने हमें यह आश्वासन दिया था,कि सिंध प्रदेश हिंदू बहुल क्षेत्र भारत में शामिल किया जाएगा,वह किसी भी हाल में नये बनने जा रहे देश में शामिल नहीं होगा।।इस आश्वासन के कारण समाज ने अपना प्रदेश नहीं छोड़ा।।लेकिन 1947 के विभाजन का त्रासदीपूर्ण होना हिंदू वर्ग के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण रहा।।चारों ओर जो दृश्य देखने को मिल रहे थे,वे भयानक मंजर लिए हुए थे।।सिंधी समाज ने तत्कालिक परिस्थितियों को देखते हुए समाज के एक बड़े वर्ग ने हमारे प्रमुख सिंधी नेता आचार्य जे.बी. कृपलानी, जयरामदास दौलतराम आलिमचंदानी,
चोइथराम गिदवानी आदि की राय मुताबिक हिंदू धर्म बाहुल्य प्रदेशों में आकर बस गये।।आज का सिंधी समाज 78-80वर्ष पूर्व की त्रासदियों से वाक़िफ नहीं है,उन्हें तत्कालीन समयकाल के पूर्वजों के आंसुओं का हिसाब भी नहीं।।
भारत से भारत आने पर हम विस्थापित कहलाये थे।।हमारे बुजुर्गों ने जो कुछ सहा,वह सहन योग्य नहीं था।। कुछ ने हमें परदेसी भी कहा।।
अपने नाट्य मंचन के द्वारा उपरोक्त दृश्य का चित्रण अनेकों मर्तबा Journey of sindhis के द्वारा कर चुके मुम्बई निवासी मोहित सेवानी की टीम इन बातों से वाकिफ़ है,जिस-जिसने यह नाट्य मंचन देखा,अपने आंसुओं को नहीं रोक पाया।। 25सदस्यीय टीम 1947 के हालात का मंच पर चित्रण विस्थापित व परदेसी का फर्क सर्व समाज को भी भलीभांति हो।।इस कार्यक्रम का उदेश्य भी यही है।।आज की बैठक में अध्यक्ष अमर गिदवानी, कार्यकारी अध्यक्ष राजेश वासवानी, इंदर डोडवानी, महामंत्री जीतू बडवानी, युवा अध्यक्ष महेश आहूजा,राजेश गुरनानी, सुदेश मंध्यान, अमरदास खट्टर,संजय मंधान आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।।
