माकड़ी (नांनंदमारा) पुल का 90% निर्माण कार्य पूरा,,3-4 दिनों वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी जाएगी,,,,,निर्माणाधीन पुल की कंपनी के स्ट्रेकचर प्रमुख रवि ने दी जानकारी,,,
कांकेर के नए बाईपास मार्ग में जिला मुख्यालय से लगे होने के बाद भी डीवाईडर का निर्माण नहीं किया गया हैं,,,और ना ही स्ट्रीट लाईट लगाई गई हैं,,,जबकि बाईपास मार्ग पहाड़ी व जंगली क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं,,,
माकड़ी (नांनंदमारा) पुल का 90% निर्माण कार्य पूरा,,3-4 दिनों वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी जाएगी,,,,,

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◾निर्माणाधीन कंपनी के स्ट्रेकचर प्रमुख रवि ने दी जानकारी,,,
◾कांकेर के नए बाईपास मार्ग में जिला मुख्यालय से लगे होने के बाद भी डीवाईडर का निर्माण नहीं किया गया हैं,,,और ना ही स्ट्रीट लाईट लगाई गई हैं,,,जबकि बाईपास मार्ग पहाड़ी व जंगली क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं,,,
▪️अनूप शर्मा▪️
कांकेर (बस्तर बन्धु) – आज बस्तर बन्धु के द्वारा कांकेर जिला मुख्यालय से लगभग 7 KM स्थित माकड़ी में निर्माणाधीन नए पूल का निरीक्षण किया गया,,,निर्माणाधीन कंपनी का कार्य देख रहें,,,,श्री रवि जी ने बस्तर बन्धु को बताया की एक हफ्ते के अंदर पूल को वाहनों के आवागमन हेतु शुरू कर दिया जाएगा,,,पूल में वाहनों के आवागमन शुरू होने की खबर मिलने के बाद कांकेरवासियों ने राहत की सांस ली हैं ।
लेकिन कांकेर के नए बाईपास मार्ग मुख्यालय होने के बाद भी डीवाईडर का निर्माण नहीं किया गया हैं,,,और ना ही स्ट्रीट लाईट लगाई गई हैं,,,जबकि बाईपास मार्ग पहाड़ी व जंगली क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं,,,नई सड़क होने के कारण इस मार्ग पर वाहनों का बहुत तेज गति से आवागमन होता हैं,,,कई दुर्घटनाएं भी इस मार्ग पर हो चुकी हैं।वही बाईपास मार्ग में डीवाईडर निर्माण नहीं किए जाने को लेकर कांकेर वासियों में थोड़ी नाराजगी भी हैं,,,क्यू की कांकेर से लेकर रायपुर तक जितने भी स्थानों में बाईपास मार्ग का निर्माण किया गया हैं हर जगह डीवाईडर बनाया गया हैं,,,साथ ही साथ स्ट्रीट लाईट भी लगाए गए हैं,,,जबकि कांकेर बाईपास मार्ग में ना डीवाईडर बनाया गया हैं और ना ही इस मार्ग पर स्ट्रीट लाईट लगाए गए हैं,,,जबकि यह क्षेत्र पहाड़ी एवं जंगली क्षेत्र होने के कारण जंगली जानवरों का भी भय हमेशा रहता हैं क्यू की हम आए दिन शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों के घुसने की खबर देखते एवं सुनते रहते हैं।
रायपुर से कांकेर तक देखा जाए तो छोटे छोटे गांवों में भी डीवाईडर बनाया गया हैं,,,,,और स्ट्रीट लाईट भी लगाए गए हैं,,,,लेकिन इस बाईपास में क्यों नहीं किया गया है यह समझ से परे हैं।
माकड़ी से आते वक्त कांकेर देवरी मार्ग को यह बाईपास मार्ग क्रॉस करतें हुए गुजरता हैं,,जिसके कारण यहां तिराहा बन गया हैं,,,चुकी यह मार्ग कांकेर,देवरी होते हुए भानुप्रतापुर,महाराष्ट्र तक जाता हैं जिसके कारण इस मार्ग पर भी आवाजाही बहुत अधिक होती हैं,,,,लेकिन इसके बाद भी इस तिराहे पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से कोई भी व्यवस्था नहीं की गई हैं,,,इस बाईपास में देखा जाए तो माकड़ी से लेकर कृषि महाविद्यालय तक शहरी क्षेत्रों के साथ साथ कई गांव भी बहुत कम कम दूरी पर स्थित हैं जिसके कारण ग्रामीणों का अपने अपने निजी कार्य से ,अपने रोजगार कार्य से इसके अलावा स्कूल कॉलेज जाने वाले ग्रामीण बच्चे भी बड़ी संख्या में इस मार्ग से प्रतिदिन आना जाना करते हैं,,जिनके लिए सुरक्षा उपाय बहुत जरूरी हैं,,,साथ ही साथ बाईपास मार्ग का पहाड़ी और जंगली क्षेत्र से गुजरने के कारण जंगली जानवरों का भी भय बना रहता हैं,, हम आएदिन शहरी क्षेत्रों में जंगली जानवरों की घुसने की खबर सुनते व देखते रहते हैं,,,शहरी एवं ग्रामीणों पर कई बार जंगली जानवरों ने जानलेवा हमला भी किया हैं,,,,इसलिए स्ट्रीट लाईट भी अति आवश्यक हैं,,,नई सड़क होने के कारण इस मार्ग पर वाहनों का बहुत तेज गति से आवागमन हो रहा है,,,, कई दुर्घटनाएं भी इस मार्ग पर हो चुकी हैं।*
जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के साथ साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देते हुए उक्त समस्या का समाधान करना चाहिए,,,,,,अन्यथा आने वाले समय में यही जन आंदोलन का बड़ा कारण बनेगा इसलिए समय पूर्व समस्याओं का निराकरण कर उचित पहल की जाए तो उत्तम होगा।
