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पं.विष्णु प्रसाद शर्मा जी का सही मूल्यांकन अब तक नहीं हो सका हैं….

पं.विष्णु महाराज जी कांकेर नगर पालिका परिषद के प्रथम अध्यक्ष रहें....

पं.विष्णु प्रसाद शर्मा जी का सही मूल्यांकन अब तक नहीं हो सका है,,,,,

▪️अनूप शर्मा▪️

(बस्तर बन्धु)

कांकेर- इस स्वार्थी संसार में बहुत कम व्यक्तित्व ऐसे होते हैं ,जिनका मूल्यांकन उनके जीते जी हो पाता है। अधिकतर के साथ यही देखा जाता है कि मृत्यु उपरांत ही उनके व्यक्तित्व का सही वज़न दुनिया के सामने आता है और आम जनता को भी उनके ऐसे गुण दिखाई देने लगते हैं, जो पहले कहीं दबे छिपे थे।
खेद का विषय है कि कांकेर के स्वर्गीय पंडित विष्णु प्रसाद शर्मा के देहावसान को 14 वर्ष व्यतीत हो जाने के पश्चात भी उनके व्यक्तित्व का सही सही मूल्यांकन आज तक नहीं हो पाया है। इस विषय में जन जागरूकता का यह हाल है कि आज भी नई पीढ़ी को ठीक से नहीं मालूम है कि जिन शर्मा जी के नाम पर कांकेर में एक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय है ,वे किन विशेषताओं के धनी थे और कांकेर की एक सड़क के अलावा विद्यालय का नाम उनके नाम पर क्यों रखा गया है?
कांकेर के अनेक नागरिक भी स्वर्गीय विष्णु प्रसाद शर्मा जी को मात्र एक अधिवक्ता और अधिक से अधिक स्वाधीनता सेनानी के रूप में याद करते हैं । बहुमुखी प्रतिभा संपन्न व्यक्तित्व को लोगों ने मात्र राजापारा निवासी एक वकील साहब के रूप में सीमित कर दिया है। ऐसे लोगों को विशेषकर नई पीढ़ी के नौजवानों को यह बताए जाने की आवश्यकता है कि न सिर्फ़ विष्णु महाराज ने अपनी छात्रावस्था में 1942 के आंदोलन में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया था बल्कि इस आंदोलन के पश्चात जब कांकेर में कांग्रेस की स्थापना हुई , तब वे संस्थापक सदस्यों में से एक थे। गिरफ्तारी की आतंक के साए में जब यहां कांग्रेस की स्थापना हुई थी, तब स्वर्गीय रामप्रसाद पोटाई तथा पंडित गोविंद प्रसाद शर्मा भी उनके साथी थे। जब कांकेर में छुआछूत का दौर चल रहा था ,तब इन्हीं साथियों ने तथा स्वर्गीय सूरजमल बाफना ने हरिजनों के साथ चाय पी कर और उन्हें मिठाई खिलाकर इस शहर तथा रियासत में छुआछूत की समाप्ति का ऐलान कर दिया था….जिसके कारण उस वक्त पंडित गोविंद प्रसाद शर्मा को समाजिक बहिष्कार तक झेलना पड़ा था। सन् 1952 में जब कांकेर नगर पालिका का चुनाव हुआ , तब अध्यक्ष पद के प्रत्यक्ष निर्वाचन में विष्णु प्रसाद शर्मा जीते थे, उस समय वे भारत के सबसे कम उम्र के नगरपालिका अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे । इस समाचार को “फ्री प्रेस जर्नल” स्टेट्समैन तथा टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी बॉक्स के रूप में प्रकाशित किया था।
इससे पूर्व आजादी के बाद ही उन्होंने विधि स्नातक की परीक्षा पास की थी और स्वयं को गरीबों का वकील घोषित किया था। उस समय उनसे पहले कांकेर में एक ही वकील रामप्रसाद पोटाई जी थे। अनेक लोग यह भी नहीं जानते कि छत्तीसगढ़ के हिंदी साहित्य के महान नक्षत्र आचार्य पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सन् 1929 से 31 तक कांकेर में क्राफर्ड स्कूल के शिक्षक बनकर आए थे और विष्णु महाराज के घर के पास ही राजमहल के एक कमरे में रहा करते थे । विष्णु महाराज बख़्शी जी से ही अपनी बाल्यावस्था में ट्यूशन पढ़ा करते थे। उन के द्वारा नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में जो कार्य किए गए, अब कुछ पुराने लोगों को ही याद हैं ।जैसे कि हर मोहल्ले में पेयजल हेतु कुआं खुदवाना, तिराहों चौराहों पर सड़क बत्तियों का इंतजाम, शहर की सड़कों में दोनों समय सुबह शाम झाड़ू लगाने की व्यवस्था। नगर पालिका की बैठकों में चाय नाश्ते का खर्च अध्यक्ष तथा पार्षद रोटेशन से निजी रूप से करते थे। यदि कहीं झाड़ू नहीं लगी हो, तो उस सड़क को साफ करने अध्यक्ष स्वयं पहुंच जाते थे । गांधी चौक को गांधी उद्यान का रूप उन्होंने ही दिया था, जिसका उद्घाटन उन्होंने किसी मंत्री से न करा कर साहित्यकार पंडित बलदेव प्रसाद मिश्र से करवाया था। गांधी जयंती तथा अन्य राष्ट्रीय पर्वों पर उनके नेतृत्व में शहर की जमकर सफाई होती थी। लोग उनकी कही गई बात को इतना मानते थे कि जहां स्ट्रीट लाइट ना हो, वहां जन सुविधा के लिए अपने अपने घरों के सामने एक बल्ब स्वयं लगा देते थे। इसी तरह पेयजल संकट होने पर लोग बिना जाति धर्म पर ध्यान दिए अपने घरों के नलकूपों को सबके लिए खोल देते थे। कांकेर एक साफ सुथरा सुंदर शहर दिखाई देता था। नदी के किनारे की रेत भी इतनी स्वच्छ होती थी कि लोग गर्म रातों को वहां जाकर किस्से कहानियां सुनाते थे और वहीं सो भी जाते थे। कोई भी व्यक्ति अथवा दुकानदार अपना कचरा नदी में नहीं फेंकता था। गढ़िया पहाड़ पर प्रतिवर्ष शिवरात्रि मेला 1953 से विष्णु महाराज ने ही प्रारंभ करवाया था। पहाड़ में बिजली की लाइन पहुंचाने की योजना उन्हीं की थी, जिस पर कार्यान्वयन सरकार की लेटलतीफी से बहुत वर्षों बाद हुआ। विधि पुरुष की उपाधि प्राप्त शर्मा जी अपने ग्राम तथा जिले के गरीबी ग्रस्त आदिवासियों को बहुत चाहते थे और उनके मुकदमे नाम मात्र की फीस पर अथवा बिना फीस के भी लड़ा करते थे। स्थानीय बार एसोसिएशन का संविधान bye-laws इन्होंने ही तैयार किया था ,जिस की नकल मध्य प्रदेश के अनेक अधिवक्ता संघों द्वारा की गई। शिक्षा जगत की सेवा उनके व्यक्तित्व का एक बहुत बड़ा आयाम था । कांकेर में महाविद्यालय की स्थापना हेतु संघर्ष समिति के संस्थापक सदस्य होने से लेकर बस्तर शिक्षा समिति के उपाध्यक्ष फिर अध्यक्ष, भारती हाई स्कूल सहित अनेक विद्यालयों के संस्थापक आप ही थे। वर्षों तक बस्तर शिक्षा समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के पश्चात उन्होंने स्वयं होकर कांकेर के कॉलेज तथा स्कूल को शासनाधीन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके स्वर्गवास के पश्चात उनके द्वारा स्थापित भारती हाई स्कूल का नामकरण पंडित विष्णु प्रसाद शर्मा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कर दिया गया। साहित्य के क्षेत्र में विष्णु महाराज का योगदान उनके जीवित रहते सामने नहीं आ पाया क्योंकि वे स्वांत: सुखाय लिखा करते थे और अपने संदूक में बंद कर दिया करते थे । उनके देहावसान के पश्चात संदूक खुला और तब जाकर लोगों को पता चला कि वह कितने महान साहित्यकार भी थे। उनके द्वारा रचित कविताओं का संग्रह “मां” शीर्षक से प्रकाशित हुआ है। एक महत्वपूर्ण लेख हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज पर भी है । कांकेर रियासत के राज्य चिन्ह आदि पर भी एक लेख है। अंग्रेजी में लिखी हुई कुछ कविताएं भी हैं, जिनमें से एक आजादी के पहले कॉलेज की पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। उपर्युक्त सारा साहित्य बस्तर बंधु के विभिन्न अंकों में प्रकाशित हो चुका है। इनके अलावा वे अपनी आत्मकथा, संस्मरण तथा कांकेर का इतिहास भी लिख रहे थे, जो अधूरे रह गये। उनके कविता संग्रह की कविताओं को हिंदी साहित्य के समीक्षकों को दिखाया जाने पर सभी ने इन कविताओं की हृदय से प्रशंसा की है। कई कविताएं तो ऐसी हैं, जिन्हें लोगों ने बड़े अक्षरों में प्रकाशित करवा कर, फ्रेम में मढ़कर अपने घरों में सजा रखा है।
स्वर्गीय विष्णु प्रसाद शर्मा आजीवन गांधीवादी और खादी प्रेमी रहे जिनके विचार हमेशा मानवतावादी और प्रगतिशील रहे। उनके निधन पर उन्हें राजकीय सम्मान प्रदान किया गया । उनकी शव यात्रा का जुलूस बरसते पानी में भी इतना विशाल था कि आज तक कांकेर में किसी की भी शव यात्रा का जुलूस इतना लंबा नहीं देखा गया। 18 जुलाई को पुण्यतिथि पर शत शत नमन,,,

Bastar Bandhu

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