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काँकेर तक रेल लाईन के नाम पर खेल करती रही केंद्र सरकारें,,,,,,,,,कांकेर की जनता को अब भाजपा की डबल इंजन की सरकार पर ही भरोसा,,,,,,,

काँकेर तक रेल लाईन के नाम पर खेल करती रही केंद्र सरकारें,,,,,
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◾कांकेर की जनता को अब भाजपा की डबल इंजन की सरकार पर ही भरोसा…

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◾अनूप शर्मा◾

कांकेर (बस्तर बन्धु) – काँकेर लोकसभा क्षेत्र सन् 1998 से पूर्व कांग्रेस के कब्जे में रहा तथा तात्कालीन सांसद और मंत्री रहें अरविंद नेताम कांकेर लोकसभा से पाँच बार निर्वाचित हुए और दो बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल भी रहें…. उसके बाद से अब तक कांकेर लोकसभा लगातार 25 वर्षों तक भाजपा के कब्ज़े में ही रहा है और ज़िले के तीन विधानसभा क्षेत्रों से भी अधिकतर भाजपा के ही विधायक निर्वाचित होते रहे हैं लेकिन अत्यंत दुख का विषय है कि केंद्र की चाहे वह कांग्रेस की सरकार हो या भाजपा की सरकार हो आज तक काँकेर की लगातार उपेक्षा ही की है ,यहां तक कि केंद्रीय रेल मंत्रालय ने भी काँकेर वालों को धमतरी से रेल द्वारा जोड़ने के आश्वासन मात्र दिए हैं पत्र लिखकर झूठा विश्वास दिलाया है लेकिन एक फुट का भी रेल मार्ग नहीं बनवाया है। यहां हम सबूत के तौर पर श्री राधेश्याम मिश्रा मांझा पारा काँकेर के नाम पर रेलवे का एक पत्र प्रकाशित कर रहे हैं, जिसमें रेलवे के बड़े साहब ने यहां तक झूठ लिख दिया है कि धमतरी- चारामा का रेल मार्ग सर्वे पूर्ण हो चुका है और इतने- इतने करोड़ की राशि भी स्वीकृत हो चुकी है यह पत्र 2020 का अर्थात 3 वर्ष पूर्व का है ।आज तक तो रेल का एक खलासी भी काँकेर नहीं आया । ?बजट राशि का क्या है वह तो किसी अन्य रसूखदार के क्षेत्र में खर्च भी हो चुकी होगी या फिर सरकारी भाषा में लैप्स हो चुकी होगी। इस प्रकार का ठगाठगी का खेल कांकेर के साथ रेल मंत्रालय वर्षों से खेले जा रहा है, फिर भी यहां के लोग लगातार कांग्रेस को जिताने के कांग्रेस से नाउम्मीद होकर अब हर बार भाजपा को ही लोकसभा के लिए जिताते चले आ रहे हैं और हर बार फिर से उनकी आस टूट जाती है। सोहन पोटाई चार बार चुने गए , उन्होंने संसद में आवाज़ भी उठाई लेकिन अन्य उन्हीं के भाजपाई सांसदों ने साथ नहीं दिया। सन् 1977 में जनता पार्टी हलथर छाप भी काँकेर में 6 माह में रेल लाने का आश्वासन देकर कांकेर से चुनाव जीत चुकी थी और तब के सांसद अघन सिंह को शर्मिंदा होना पड़ा था। उनके बाद के पांच बार के सांसद अरविन्द नेतामजी ने तो स्पष्ट कर दिया था कि चारामा घाट की बड़ी बाधा के कारण सीधे रास्ते से तो रेल कांकेर कभी नहीं आ सकेगी। रेलवे को भानुप्रतापपुर ही पोसा एगा क्योंकि कच्चे लोहे को राव घाट से भिलाई तक पहुंचाने हेतु यही रेल मार्ग शॉर्टकट है। उस ज़माने से अब तक यह सच्चा चुटकुला इस क्षेत्र में कहा-सुना जाता है कि आख़िर कांकेर में रेल क्यों नहीं आ सकती? उत्तर है क्योंकि यहां इंडस्ट्रीज़ नहीं है और काँकेर क्षेत्र में इंडस्ट्रीज़ क्यों नहीं है, इसके जवाब में कहा जाता है क्योंकि यहां रेल मार्ग नहीं है ! देख लीजिए कि केंद्र की सरकारों के नेता ,मंत्री और अधिकारी कितनी होशियारी से काँकेर के साथ रेल के नाम पर ठगाठगी का खेल करते रहते हैं।

Bastar Bandhu

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